बिलासपुर, 30 मार्च। निगम के ठेकेदारों द्वारा ठेका कर्मियों को चार माह के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है और न पीएफ की जानकारी दी जा रही है। आक्रोशित ठेका कर्मियों ने बुधवार को निगम आयुक्त और महापौर को ज्ञापन सौप वेतन दिलाने की मांग की है।
बिलासपुर, 30 मार्च। निगम आयुक्त और मेयर को सौंपे गए ज्ञापन में ठेका कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें होलिकोत्सव तक में वेतन नही दिया गया। दिसम्बर माह से मार्च तक का वेतन बकाया है, इतना ही नही उनका पीएफ भी नही जमा कराया जा रहा न इसके सम्बन्ध में कोई जानकारी दी जा रही है। वेतन के लिए चक्कर कटवाया जा रहा
बिलासपुर, 30 मार्च। जबकि निगम आयुक्त का कहना है कि वे हर माह बिल में साइन कर भुगतान के लिए भेज रहे, सवाल यह उठ रहा कि आखिर फिर इन कर्मचारियों के वेतन का पैसा जा कहा रहा है। कर्मचारियों ने 4 माह के बकाया वेतन का एक मुश्त भुगतान कराने और पीएफ की राशि जमा कराने और पीएफ की स्थिति से को अवगत कराने की मांग की है।
बिलासपुर, 30 मार्च। जब निगम आयुक्त हर माह ठेका कर्मियों का बिल पास करने की बात कह रहे तो फिर ठेका कर्मियों को उनके पारिश्रमिक का भुगतान क्यो नही किया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा मामले में टाल मटोल की जा रही है। नगर निगम बिलासपुर पानी बिजली सफाई उद्यान ड्राइवर माली मूलभूत सुविधा ठेकेदारों के ठेके श्रमिकों के हाथ में ठेकेदार और कोई नहीं वर्षों से नगर निगम की राजनीति में वार्ड मेंबर मेयर इन काउंसिल के सदस्य राजनीतिक रसूखदार ठेका श्रमिकों के ठेकेदार चाहे दिल्ली चंडीगढ़ हैदराबाद मोहाली की कंपनी भले ही कागज में नाम के कॉन्टैक्टर बताया जाता हैं लेकिन ठेका श्रमिक काम करने वाले वही ठेकेदारी पद्धति के मालिक और श्रमिक ही करते हैं भले ही बड़ी कंपनियों के ठेके की शर्तों के अनुसार मशीनरी मैन्युअल डक्टिंग स्वैपिंग डोजिंग लोडिंग अनलोडिंग यह सारी मशीनरी के साथ-साथ कार्यरत कर्मचारी का पारिश्रमिक भुगतान संविदा गाइडलाइन रेट के अनुसार साथ ही घटना दुर्घटना से मुआवजा लेबर बीमा केंद्रीय एवं राज्य सरकार के श्रम विभाग का पंजीयन एवं पीएफ ईपीएफ प्रत्येक लेबर का ठेकेदार को अनिवार्य रूप से करवाना लेबर ठेका मैं अनिवार्यता नियम के अंतर्गत है
नियमों को ताक में रखकर लेबर एवं विभाग की अनदेखी की जाती है कार्यरत मजदूर को प्रत्येक माह वेतन का भुगतान न होना और उनके अन्य पारिश्रमिक गाइडलाइन के अनुसार सुविधा प्रधान न करके ठेके के नियमों के साथ-सा द सरकारी उपक्रम के कार्यों को भी प्रभावित किया जाता है।